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हिंदी वर्णों के विश्लेषण पर आधारित प्रश्नोत्तरी
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भारतीय भाषाओं में कुछ ध्वनियाँ ऐसी हैं जिनके आंचलिक उच्चारण कालांतर में मूल से छिटक गए हैं। कुछ समय के साथ लुप्तप्राय हो गए, कुछ बहस का मुद्दा बने और कुछ मिलती-जुलती ध्वनि के भ्रम में फँस गए। उच्चारण के विषय में इस प्रकार की दुविधा को देखते हुए मैं समय-समय पर भाषा, लिपि और ध्वनियों की बारीकी स्पष्ट करते हुए आलेख प्रकाशित करने को प्रतिबद्ध हूं। आगामी हिन्दी दिवस पर इसी शृंखला में एक और बड़े भ्रम पर बात करना स्वाभाविक ही है। यह भ्रम है श और ष के बीच का। भारतीय वाक् में ध्वनियों को जिस प्रकार मुखस्थान या बोलने की सुविधा के हिसाब से बाँटा गया है उससे इस विषय में किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए क्योंकि इसका वर्गीकरण वैज्ञानिक है परंतु हमारे हिन्दी शिक्षण में जिस प्रकार सतर्कता के अभाव के साथ-साथ तथाकथित विद्वानों द्वारा परंपरा के साथ अस्पृश्यता का व्यवहार किया जाता है उससे ऐसे भ्रम पैदा होना और बढ़ना स्वाभाविक है। ष की बात करने से पहले सरलता के लिये आइए आरंभ "श" से करते हैं। श की ध्वनि सरल है। आमतौर पर विभिन्न भाषाओं में और भाषाओं से इतर आप श (SH) जैसी जो ध्वनि बोलते सुनते हैं...
रीतिकाव्य रीतिबद्ध' रचना लक्षणों और उदाहरणों से युक्त होती हैं । रीतिबद्ध कवि वे हैं, जिन्होंने रीतिग्रंथों की रचना न करके काव्य-सिद्धांतों या लक्षणों के अनुसार काव्य-रचना की है। अलंकार, रस, नायिकाभेद, ध्वनि आदि उनके ध्यान में तो रहें हैं, परंतु उनका प्रत्यक्षतः निरूपण इन कवियों ने नहीं किया है, वरन् उनके अनुसार उत्कृष्ट काव्य का सृजन किया है। आचार्य विश्वनाथप्रसाद जी के अनुसार जो रीतिसिद्ध कवि हैं वही डॉ. नगेन्द्र के अनुसार रीतिबद्ध कवि हैं! हिंदी साहित्य का इतिहास : डॉ.नगेन्द्र 1. आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र 2. डॉ नगेन्द्र
हिन्दी शब्द किस भाषा से लिया गया है? हिन्दी शब्द फारसी भाषा से लिया गया है इसका सर्वप्रथम प्रयोग सैफुद्दीन यजद्दी ने अपने ग्रंथ जफरनामा में 1424 में किया था।
हिंदी प्रदेशों में संख्यावाचक शब्दों के उच्चारण और लेखन में प्रायः एकरूपता का अभाव दिखाई देता है। इसीलिए एक से सौ तक सभी संख्यावाचक शब्दों पर विचार करने के बाद इनका जो मानक रूप स्वीकृत हुआ, वह इस प्रकार है - संख्यावाचक शब्द
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