संघर्षी वर्ण श/स/ष में आधारभूत अंतर जाने/sh/sa/sh me aadharabhut antar jane.
भारतीय भाषाओं में कुछ ध्वनियाँ ऐसी हैं जिनके आंचलिक उच्चारण कालांतर में मूल से छिटक गए हैं। कुछ समय के साथ लुप्तप्राय हो गए, कुछ बहस का मुद्दा बने और कुछ मिलती-जुलती ध्वनि के भ्रम में फँस गए। उच्चारण के विषय में इस प्रकार की दुविधा को देखते हुए मैं समय-समय पर भाषा, लिपि और ध्वनियों की बारीकी स्पष्ट करते हुए आलेख प्रकाशित करने को प्रतिबद्ध हूं। आगामी हिन्दी दिवस पर इसी शृंखला में एक और बड़े भ्रम पर बात करना स्वाभाविक ही है। यह भ्रम है श और ष के बीच का। भारतीय वाक् में ध्वनियों को जिस प्रकार मुखस्थान या बोलने की सुविधा के हिसाब से बाँटा गया है उससे इस विषय में किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए क्योंकि इसका वर्गीकरण वैज्ञानिक है परंतु हमारे हिन्दी शिक्षण में जिस प्रकार सतर्कता के अभाव के साथ-साथ तथाकथित विद्वानों द्वारा परंपरा के साथ अस्पृश्यता का व्यवहार किया जाता है उससे ऐसे भ्रम पैदा होना और बढ़ना स्वाभाविक है। ष की बात करने से पहले सरलता के लिये आइए आरंभ "श" से करते हैं। श की ध्वनि सरल है। आमतौर पर विभिन्न भाषाओं में और भाषाओं से इतर आप श (SH) जैसी जो ध्वनि बोलते सुनते हैं...
हिंदी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1424 ईस्वी में अपने ग्रंथ जफरनामा में विदेशों में `हिंदी भाषा " के अर्थ में किया गया !
जवाब देंहटाएंडॉ धीरेंद्र वर्मा द्वारा संपादित "हिंदी साहित्य कोश"भाग फर्स्ट के अनुसार 13वीं 14वीं शताब्दी में देशी भाषा को हिंदी हिंदी या हिंदकी या हिंदुई नाम देने में अबुल हसन या अमीर खुसरो का नाम सबसे अधिक महत्वपूर्ण है!
जवाब देंहटाएंहिंदी का नवीन अर्थ में लिखित प्रयोग सर्वप्रथम केप्टिन टेलर ने सन् 1812 ईस्वी में फोर्ट विलियम कॉलेज के वार्षिक विवरण में किया!
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