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मानक हिंदी वर्णमाला तथा अंक/ standard Hindi alphabets and points

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    वर्ण भाषा की ध्वनियों के उच्चरित तथा लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं। लिपि चिह्न भाषा के लिखित रूप के प्रतीक होते हैं। इस दृष्टि से लिपि-चिह्न वर्ण के अंतर्गत आते हैं। इन वर्गों के क्रमबद्ध समूह को 'वर्णमाला' कहते हैं। वर्णमाला में सर्वत्र एकरूपता बनाए रखने के लिए हिंदी वर्णमाला तथा अंकों का अद्यतन मानक स्वरूप निर्धारित किया गया है जो इस प्रकार है :- हिंदी की वर्णमाला-  स्वर -  अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ संस्कृत के लिए प्रयुक्त देवनागरी में ॠ, लृ तथा ॡ भी सम्मिलित हैं, किंतु हिंदी में इनका प्रयोग न होने के कारण इन्हें हिंदी की मानक वर्णमाला में स्थान नहीं दिया गया है। मूल व्यंजन - क ख ग घ ङ  च छ ज झ ञ  ट ठ ड ढ ण    ड़ ढ़  त थ द ध न  प फ ब भ म  य र ल व   श ष स ह  ड़ और ढ़ व्यंजन रूप हिंदी में स्वीकृत ध्वनियाँ हैं। इस तरह हिंदी वर्णमाला में मूलतः 11 स्वर तथा 35 (33 + 2) व्यंजन है संयुक्त व्यंजन- क्ष (क् + ष) त्र (त् + र) ज्ञ (ज् + ञ) श्र (श् + र) अनुस्वार (शिरोबिंदु) -      ऻ     संयम अनुनासिक  (...

हिंदी क्यों और कैसे तथा संधि संबंधी त्रुटियाँ/ Hindi kyon aur kaise sandhi trutiyaan

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  हिंदी क्यों और कैसे ?  भाषा नितांत सामाजिक वस्तु होती है। वह समाज के रंग में रंग कर ही विकसित होती है। आज के उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण के इस दौर में किसी भी भाषा के साहित्यिक रूप के साथ-साथ उसके प्रतियोगितापरक रूपों का विकास भी अनिवार्य है। आज वही व्यक्ति समाज में जीवन यापन कर पाएगा जिसको भाषा के बहुआयामी रूपों की जानकारी है। इसी क्रम में भारत की अधिकृत भाषा हिंदी है, जिसको बोलने, समझने, पढ़ने, लिखने वालों की संख्या लगभग 75 से 80 करोड़ है। इतनी बड़ी संख्या में हिंदी लोगों की जुबान (व्यवहृत भाषा) है। इससे स्वतः ही इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है। हिंदी आज राजभाषा, संपर्क भाषा एवं वैश्विक बाजार संचालन की भाषा के रूप में प्रमुखता प्राप्त किए हुए हैं। हिंदी का केवल साहित्यिक रूप ही नहीं बल्कि प्रयोजनपरक रूप भी इस समय सर्वाधिक चर्चित है। इसका (हिंदी) अध्ययन, अध्यापन अब केवल साहित्यिक सेवा के लिए ही नहीं बल्कि आजीविका के लिए भी सामने है। इसके अध्येता अब अनेक क्षेत्रों में अपने भविष्य का निर्धारण कर सकते  हैं। वर्तमान काल का भयावह सच है- बेरोजगारी। वैश्वीकरण और बाजारीकरण के बढ़ते...